सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यूपी के कानून-व्यवस्था के मॉडल और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को लेकर एक बार फिर तीखी बहस छिड़ गई है। सोशल मीडिया यूजर दीपक शर्मा (@SonOfBharat7) द्वारा हाल ही में साझा किए गए एक पोस्ट और वीडियो ने उत्तर प्रदेश की राजनीति और पुलिसिया कार्रवाई के तौर-तरीकों को लेकर सियासत को गर्मा दिया है। इस पोस्ट में सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए राज्य में अपराधियों और पुलिस एक्शन को लेकर दोहरे रवैये का आरोप लगाया गया है।
क्या है पूरा मामला और वायरल पोस्ट में आरोप?
वायरल हो रहे पोस्ट में यह सवाल उठाया गया है कि जब राज्य में कोई आपराधिक घटना घटती है, तो विपक्षी दल तुरंत कानून-व्यवस्था की नाकामी का हवाला देकर सरकार पर हमलावर हो जाते हैं। वहीं, इसके विपरीत जब पुलिस सख्त रुख अपनाते हुए अपराधियों पर शिकंजा कसती है या एनकाउंटर जैसी कार्रवाई करती है, तो इसे मानवाधिकारों का हनन बताकर विरोध शुरू कर दिया जाता है।
पोस्ट के साथ एक वीडियो का हवाला देते हुए एक जिला बदर गैंगस्टर पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। दावा किया गया है कि उक्त आरोपी, जो कथित तौर पर भीम आर्मी के नेताओं के साथ मिलकर गरीबों की जमीनें हड़पने के मामलों में लिप्त रहा है, वह थाने के भीतर खुलेआम दबंगई और गुंडागर्दी कर रहा है। वीडियो के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि किस तरह कुछ अपराधी पुलिस परिसरों में भी कानून की परवाह किए बिना धौंस जमाते हैं।
अखिलेश यादव पर तीखा तंज और ‘बाबा’ के बुलडोजर-एनकाउंटर मॉडल की चर्चा
इस मामले को लेकर समाजवादी पार्टी नेतृत्व पर सीधा तंज कसा गया है। पोस्ट में लिखा गया है— “आखिर अखिलेश जी चाहते क्या हों आप… ज़रा देखो आपके इस जिला बदर गंगेस्टर गुंडे को जो भीम आर्मी नेताओं के साथ मिलकर गरीबों की जमीने हड़पता किस तरह थाने में गुंडागर्दी कर रहा…”
साथ ही यह चेतावनी भरे लहसुन में कहा गया है कि यदि यूपी पुलिस अपने पारंपरिक और सख्त अंदाज में ऐसे तत्वों को जवाब नहीं देगी, तो कानून का खौफ कैसे कायम होगा। इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त प्रशासनिक रुख (जिसे आमतौर पर ‘बाबा का बुलडोजर और एनकाउंटर मॉडल’ कहा जाता है) का जिक्र करते हुए लिखा गया है कि यदि राजनीतिक रूप से लगाम नहीं कसी गई, तो शासन स्तर पर कार्रवाई करना अच्छी तरह आता है।
क्यों गरमाया है यह मुद्दा?
उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ पुलिस की सख्ती और विपक्ष के विरोध का मुद्दा हमेशा से राजनीतिक गलियारों में केंद्र में रहा है। एक तरफ जहां सत्ता पक्ष और उसके समर्थक इसे ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति का हिस्सा बताते हैं, वहीं विपक्ष लगातार पुलिस हिरासत में मौतों, मानवाधिकारों के उल्लंघन और चुनिंदा कार्रवाई के आरोप लगाता रहा है। थाने के अंदर कथित तौर पर गैंगस्टर की गुंडागर्दी सामने आने के बाद अब देखना यह होगा कि इस मामले में स्थानीय पुलिस प्रशासन क्या औपचारिक कदम उठाता है और राजनीतिक दलों की तरफ से इस पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
