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BAREILLY: रामपुर में पासपोर्ट घोटाला: आरोपी फरार, खुफिया एजेंसियां अलर्ट

– 29 अप्रैल 2025, रामपुर

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले से सामने आया पासपोर्ट घोटाला सुरक्षा एजेंसियों के लिए खतरे की घंटी बन गया है। जिले के भोट थाना क्षेत्र के तालबपुर गांव निवासी आरिफ खान ने न सिर्फ अलग-अलग नामों से पासपोर्ट बनवाए, बल्कि पहचान और जन्मतिथि में भी फर्जीवाड़ा किया। मामला तब उजागर हुआ जब चौथी बार पासपोर्ट आवेदन में जन्मतिथि में 16 साल का अंतर पाया गया। इसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई शुरू की, लेकिन आरोपी फरार हो गया है। अब खुफिया एजेंसियां मामले की गहराई से जांच कर रही हैं।

कैसे हुआ घोटाला?

घोटाले की शुरुआत 2011 से हुई जब आरिफ खान ने बरेली स्थित रीजनल पासपोर्ट ऑफिस से पहला पासपोर्ट बनवाया। इस पासपोर्ट में उसने अपना नाम “आरिफ खान” और जन्मतिथि 15 जनवरी 1983 बताई थी। इसके बाद पासपोर्ट का नवीनीकरण भी सामान्य प्रक्रिया से किया गया और किसी को कोई संदेह नहीं हुआ।

लेकिन, 2023 में आरिफ ने फिर से पासपोर्ट बनवाने के लिए आवेदन किया, लेकिन इस बार उसने अपनी पहचान में बदलाव किया। उसने अपना नाम बदलकर “आलिम पुत्र अहमद अली” और जन्मतिथि 15 मार्च 1999 दर्शाई। चौंकाने वाली बात ये थी कि इस बार पासपोर्ट विभाग ने बिना किसी संदेह के तीसरा पासपोर्ट जारी कर दिया।

जब आरिफ ने चौथी बार पासपोर्ट के लिए आवेदन किया, तब जन्मतिथि में 16 साल का अंतर पाया गया, जिससे विभाग को शक हुआ और जांच शुरू कर दी गई।

एफआईआर और फरार आरोपी

पासपोर्ट अधिकारी ने पूरी घटना की जानकारी रामपुर के पुलिस अधीक्षक को दी और फिर एफआईआर दर्ज करवाई। आरोपी पर जालसाजी, धोखाधड़ी, और फर्जी दस्तावेज तैयार करने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, एफआईआर दर्ज होते ही आरोपी फरार हो गया और पुलिस उसकी तलाश में जुट गई है।

अब खुफिया एजेंसियां भी इस मामले पर नजर रख रही हैं, क्योंकि यह सवाल खड़ा करता है कि आरिफ ने फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल किस लिए किया? क्या वह अवैध गतिविधियों में शामिल था या इन पासपोर्टों का इस्तेमाल विदेश यात्रा के लिए किया गया था?

पासपोर्ट विभाग की लापरवाही पर सवाल

यह मामला पासपोर्ट विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। जिस प्रकार आरिफ ने अपनी पहचान बदली और विभाग ने इसका पता नहीं लगाया, वह एक बड़ी चूक मानी जा रही है। जब आधार, मोबाइल नंबर, और पते की प्रमाणिकता की जांच होती है, तो इतनी बड़ी पहचान की हेराफेरी कैसे नजरअंदाज हो गई?

इस पूरे मामले को लेकर पुलिस और खुफिया एजेंसियां जांच में जुटी हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं यह घोटाला राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए तो खतरा नहीं पैदा कर रहा।

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Author: namesteyindia

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