खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तर प्रदेश के आयुक्त श्री राजेश कुमार ने राज्यभर के औषधि अनुज्ञापन प्राधिकरणों और निरीक्षकों को सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा है कि नवीन औषधि विक्रय लाइसेंस (थोक एवं फुटकर) और रिटेन्शन से सम्बन्धित आवेदनों का निस्तारण निर्धारित समयसीमा में नहीं किया जाना अत्यंत गंभीर लापरवाही है। यदि शिकायतें मिलीं तो संबंधित अधिकारियों पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
यह सख्त रुख उस वक्त सामने आया जब केमिस्टस एंड ड्रगिस्ट्स फेडरेशन, उत्तर प्रदेश ने आयुक्त को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि लाइसेंस निर्गमन की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी और व्यापारियों का शोषण हो रहा है।
आयुक्त ने दो टूक कहा कि थोक एवं फुटकर औषधि लाइसेंस 15 दिनों में तथा रिटेन्शन 2 कार्यदिवस के भीतर निर्गत किया जाना शासन द्वारा निर्धारित है। फरवरी 2025 में पहले ही निर्देश जारी किए जा चुके हैं, बावजूद इसके कई जिलों में आवेदनों का समय पर निस्तारण नहीं हो रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में किसी भी व्यापारी या संगठन की ओर से भ्रष्टाचार या शोषण की शिकायत प्राप्त होती है, तो सम्बंधित अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
आयुक्त ने सभी सहायक आयुक्त (औषधि) एवं औषधि निरीक्षकों को निर्देशित किया है कि वे अपने स्तर पर लंबित आवेदनों को तत्काल निस्तारित करें एवं मांगे गए स्पष्टीकरण को पत्र प्राप्ति के दो कार्यदिवस में अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करें
