यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित की जा चुकी 165वीं रामलीला और राम बारात बड़ी धूमधाम से निकाली जा रही है। जिसमें बड़ी संख्या में हुरियारे यानी कि बाराती शामिल हुए है। आगे आगे 12 ट्रैक्टर ट्रालीयों पर सवार बाराती और पीछे भगवान रामचंद्र सीता माता के साथ रथ पर सवार है। राम बारात देखने के लिए दूर दूर से लोग आयें हुए है। और जगह जगह बारातियों पर रंगो की बौछार की जा रही है। इस दौरान सभी मस्जिदों को त्रिपाल से ढक दिया गया है ताकि मस्जिद पर रंग न पड़ सके।
8 मार्च से शुरू हुई रामलीला
विश्व विख्यात रामलीला 8 मार्च को पताका यात्रा के साथ शुरू हुई। जिसमें बुधवार को धनुष यज्ञ हुआ। जहां श्री रामचंद्र ने धनुष को बड़ी आसानी से तोड़ दिया। सीता मां से स्वयंवर के लिए आए बड़े बड़े राजा महाराजा और बड़े बड़े शक्तिशाली योद्धाओं ने भाग लिया। लेकिन कोई धनुष को हिला भी न सका। सीता स्वयंवर में भगवान श्री राम ने शिव धनुष को उठाया तो पूरा पंडाल जय श्रीराम के जयकारे से गूंज उठा। रामलीला की शुरूआत में जनकपुर में राजा जनक अपनी पुत्री सीता के स्वयंवर के लिए देश देशांतर के राजाओं को बुलवाते हैं और शिव धनुष को उठाने व प्रत्यंचा चढ़ाने की शर्त रखते हैं, कोई भी राजा धनुष को हिला नहीं पाता है। राजा जनक के अभिनय ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। इस दौरान रावण-बाणासुर के ओजस्वी संवादों को सुनकर श्रद्धालु रोमांचित हो उठे। अंततः रावण स्वयंवर सभा छोड़कर लंका वापस लौट जाता है उधर जब सारे राजा धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाना तो दूर, उसे तिल भर हिला तक नहीं पाते हैं तो यह देखकर राजा जनक अधीर हो उठते हैं और करुण विलाप करते हैं वो इस आशंका से भयभीत हो जाते हैं कि उनके इस कठिन प्रण के चलते सीता जी जीवन भर कुंवारी ना रह जाएं, वह हताशा भरे गुस्से में आकर सबको ताना देते हैं और पृथ्वी को वीरों से खाली बता देते हैं। इस बात से लक्ष्मण जी क्रोधित हो जाते हैं और अपनी प्रतिक्रिया तीखे संवादों से देते हैं तब राम जी अपने अनुज को शांत करते हैं अंत में प्रभु श्री राम गुरू विश्वामित्र की आज्ञा से शिव धनुष को उठा कर प्रत्यंचा चढ़ाते हैं, फिर सीता जी राम जी का विवाह संपन्न हो जाता है।
यूनेस्को वर्ल्ड हैरिटेज लिस्ट में शामिल होना
बरेली की फाल्गुनी रामलीला को हाल ही में यूनेस्को की वर्ल्ड हैरिटेज लिस्ट में शामिल किया गया है, जो इसे वैश्विक स्तर पर मान्यता प्रदान करता है। यह बहुत बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि यह भारत की सांस्कृतिक धरोहर को विश्व पटल पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस रामलीला को यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड हैरिटेज लिस्ट में शामिल किए जाने के बाद इसकी अहमियत और बढ़ गई है, और अब यह आयोजन न केवल बरेली, बल्कि पूरे देश और दुनिया में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता प्राप्त कर चुका है। इस मान्यता के बाद बरेली की रामलीला और भी प्रसिद्ध हो गई है, और यहां आने वाले पर्यटकों के लिए यह एक प्रमुख आकर्षण बन गई है। साथ ही, स्थानीय कलाकारों को भी एक अंतरराष्ट्रीय मंच मिलने का अवसर मिला है। यह न केवल सांस्कृतिक धरोहर को बचाने का प्रयास है, बल्कि यह हमारे सांस्कृतिक महत्व को भी दुनिया भर में फैलाने का एक प्रभावी तरीका है।
