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ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश: विद्युत उत्पादन, वितरण और नवकरणीय ऊर्जा में ऐतिहासिक प्रगति

बदायूं, 09 मई। उत्तर प्रदेश सरकार ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस और दूरदर्शी कदम उठा रही है। ऊर्जा के अभाव में तो जीवन की कल्पना संभव है और ही विकास की। इसे ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में ऊर्जा के उत्पादन, आपूर्ति और नवकरणीय स्रोतों को बढ़ावा देने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

विद्युत आपूर्ति की मजबूती

प्रदेश में वर्ष 2024-25 के अंत तक ग्रामीण क्षेत्रों में औसतन 20 घंटे 35 मिनट, तहसील मुख्यालयों में 22 घंटे 36 मिनट तथा जिला मुख्यालयों में 24 घंटे विद्युत आपूर्ति की जा रही है। अब तक 2,94,818 मजरों का विद्युतीकरण हो चुका है और 2017 से अब तक 165 लाख नए विद्युत कनेक्शन दिए गए हैं। साथ ही 749 नए उपकेंद्र स्थापित और 1,528 उपकेंद्रों की क्षमता बढ़ाई गई है।

सौर ऊर्जा की ओर बढ़ते कदम

अयोध्या को सोलर सिटी और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे को सोलर एक्सप्रेसवे के रूप में विकसित किया जा रहा है। 16 नगर निगमों और नोएडा को भी सोलर सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। प्रदेश में वर्ष 2022 में लागू सौर ऊर्जा नीति-2022 के अंतर्गत 22,000 मेगावॉट उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें निजी निवेश से 2,653 मेगावॉट क्षमता की परियोजनाएं स्थापित की गई हैं।

नवाचार और अधुनिकीकरण

एनटीपीसी और उत्तर प्रदेश विद्युत उत्पादन निगम के संयुक्त उपक्रम से झांसी में 200 मेगावॉट का सौर संयंत्र, जालौन में 500 मेगावॉट की परियोजना, और ओबरा डी तापीय परियोजना के तहत 2,800 मेगावॉट की इकाई स्थापित की जा रही है। घाटमपुर तापीय परियोजना की पहली इकाई पूरी हो चुकी है और बाकी दो इकाइयों से क्रमशः मई अगस्त 2025 से उत्पादन प्रारंभ होगा।

पारेषण और वितरण में सुधार

2017 से अब तक ₹24,800 करोड़ की लागत से 193 पारेषण उपकेंद्र और संबंधित लाइनें स्थापित की गई हैं। खुले तारों को हटाकर 51,941 किमी. एबी केबल बिछाई गई हैं। स्मार्ट मीटरिंग, रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन स्कीम और 627 कैपेसिटर बैंकों की स्थापना से विद्युत व्यवस्था को आधुनिक बनाया गया है।

कृषि क्षेत्र के लिए विशेष पहल

डार्क जोन से प्रतिबंध हटाने से एक लाख किसान लाभान्वित हुए हैं। 14 लाख नलकूपों के बिल माफ किए गए हैं और 1.88 लाख निजी नलकूपों का संयोजन किया गया है। कृषि फीडरों के पृथक्करण के तहत 3,817 फीडर तैयार हो चुके हैं।

जैव ऊर्जा और हरित ऊर्जा में विस्तार

उत्तर प्रदेश जैव ऊर्जा नीति-2022 के तहत 53 परियोजनाओं को स्वीकृति और 24 को कार्यान्वित किया जा चुका है। गोरखपुर में कम्प्रेस्ड बायो गैस प्लांट की स्थापना हो चुकी है। भविष्य में 10,795 मेगावॉट तापीय ऊर्जा की अतिरिक्त आवश्यकता और 23,500 मेगावॉट नवकरणीय ऊर्जा की खरीद के लिए रोडमैप तैयार कर लिया गया है।

रोजगार एवं प्रशिक्षण

वर्ष 2025-26 में 3,000 सूर्यमित्रों को प्रशिक्षण दिया जाएगा जिससे कौशल विकास एवं रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

निष्कर्षतः, उत्तर प्रदेश सरकार ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में तेज़ी से अग्रसर है। चाहे वो परंपरागत ऊर्जा हो, या हरित ऊर्जा, प्रदेश ने ऊर्जा उत्पादन, वितरण, और उपयोग के हर क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।

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Author: namesteyindia

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