बदायूं, 29 अप्रैल 2025
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बदायूं द्वारा मंगलवार को राधे लाल इंटर कॉलेज, कछला में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/सचिव शिव कुमारी ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया। कार्यक्रम में छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना व स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया, जिससे वातावरण भावविभोर हो उठा।
छात्राओं को विधिक अधिकारों की दी गई जानकारी, टोल फ्री नम्बर 15100 पर पाएं निःशुल्क विधिक सहायता
छात्राओं को जागरूक करते हुए एडीजे शिव कुमारी ने कहा कि जीवन में लक्ष्य निर्धारित कर अध्ययन करें, सोशल मीडिया का सतर्कता से करें उपयोग, और अश्लील सामग्री से दूर रहें। उन्होंने जोर दिया कि छात्राएं शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करें और इंटरनेट का रचनात्मक एवं सुरक्षित उपयोग करें ताकि उनका उज्ज्वल भविष्य सुरक्षित रह सके।
कार्यक्रम में छात्राओं को भारतीय संविधान में वर्णित महिला अधिकारों, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न अधिनियम, पॉक्सो एक्ट, निःशुल्क विधिक सहायता अधिनियम 1987 की धारा 12 समेत महिलाओं की सुरक्षा और कल्याण से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई। साथ ही बताया गया कि टोल फ्री नम्बर 15100 पर कॉल कर निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त की जा सकती है।
शिव कुमारी ने छात्राओं को प्रेरित किया कि वे पर्यावरण संरक्षण हेतु अधिक से अधिक वृक्षारोपण करें, स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें और सड़क सुरक्षा नियमों जैसे हेल्मेट व सीट बेल्ट का पालन करें। उन्होंने अपराधों जैसे एसिड अटैक, बलात्कार, अपहरण, दहेज उत्पीड़न आदि के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी और उनसे सतर्क रहने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में असिस्टेंट एलएडीसी कशिश सक्सेना ने संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 18, 21 व 21ए और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 पर प्रकाश डालते हुए छात्र-छात्राओं को उनके विधिक अधिकारों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में प्री-लिटिगेशन स्तर पर सुलह-समझौते के आधार पर मुकदमों का निस्तारण संभव है।
अंत में एडीजे शिव कुमारी ने कछला स्थित नवजीवन वृद्धाश्रम का निरीक्षण किया और पाई गई कमियों को दूर करने के निर्देश आश्रम प्रभारी को दिए। उन्होंने साफ-सफाई व मच्छरों से बचाव हेतु उचित प्रबंध कर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को अवगत कराने के निर्देश भी दिए।
यह जागरूकता शिविर न सिर्फ छात्राओं को उनके अधिकारों के प्रति सजग करने का एक प्रयास था, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर एवं विधिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम भी साबित हुआ।
