उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने राज्य भर में बिक रही दवाओं की गुणवत्ता पर शिकंजा कसने के लिए एक सख्त और निर्णायक कदम उठाया है। आयुक्त राजेश कुमार ने 28 अप्रैल 2025 को जारी एक आदेश में सभी सहायक आयुक्तों और औषधि निरीक्षकों को निर्देशित किया है कि वे सैंपलिंग के लिए एक ठोस अधिसूचना तंत्र विकसित करें और लक्षित कार्यवाही करें।
आदेश के मुख्य बिंदु:-बिलविहीन दवाएं होंगी जांच के दायरे में: जिन दवाओं के क्रय बिल उपलब्ध नहीं हैं, उनके नमूनें प्राथमिकता पर लिये जायें।
डिजिटल भुगतान वाली दवाओं के सैंपल अनिवार्य: जिन दवाओं की खरीद डिजिटल माध्यम से की गई है, उनके भी नमूने लेना अनिवार्य किया गया है।महंगी और तेजी से बिकने वाली दवाओं पर विशेष नजर: इन पर सघन निगरानी और नमूना संग्रहण के निर्देश दिए गए हैं।बाहरी राज्यों के स्पूरियस दवा निर्माताओं पर सीधी कार्रवाई: हिमाचल, उत्तराखंड, पंजाब जैसे राज्यों के संदिग्ध निर्माताओं की दवाओं के सैंपल को शीर्ष प्राथमिकता पर लिया जाए।एंटीबायोटिक दवाओं की सख्त जांच: एंटीबायोटिक दवाओं की सैंपलिंग को भी प्राथमिकता सूची में रखा गया है।
आयुक्त राजेश कुमार का दो टूक संदेश:
आदेश प्रदेशभर के औषधि निरीक्षकों और सहायक आयुक्तों के लिए चेतावनी की तरह है कि अब लापरवाही नहीं चलेगी, और यदि किसी स्तर पर चूक पाई गई तो जवाबदेही भी तय होगी।
“दवाओं की गुणवत्ता से समझौता नहीं होगा। जिलों में अधिसूचित तंत्र बनाकर लक्षित और प्रभावी कार्यवाही की जाए। सभी अधिकारियों को इस आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करना होगा।”
