बदायूं, 23 अप्रैल।
भारत, विश्व में सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में दूसरे स्थान पर है और 90 लाख हेक्टेयर भूमि पर 192 मिलियन टन से अधिक उत्पादन कर रहा है। इसमें उत्तर प्रदेश का प्रमुख योगदान है, जो देश का शीर्ष सब्जी उत्पादक राज्य बनकर उभरा है।
प्रदेश सरकार द्वारा तकनीकी सहायता, संरक्षित खेती, जैविक खाद और सूक्ष्म सिंचाई पद्धति (ड्रिप और स्प्रिंकलर) को बढ़ावा दिए जाने से छोटे और मझोले किसानों की आय में बढ़ोत्तरी हुई है।
सब्जी फसलों में टमाटर, बैंगन, फूलगोभी, पालक, मटर, लौकी, करेला आदि मुख्य हैं, जिनकी खेती अब उन्नत प्रजातियों और वैज्ञानिक तरीकों से हो रही है।
उत्तर प्रदेश बना देश का शीर्ष सब्जी उत्पादक राज्य, मचान विधि से बढ़ी फलों की गुणवत्ता
किसानों द्वारा पौधशाला प्रबंधन, पूर्व अंकुरण, मचान विधि, और पलवार तकनीक का प्रयोग करके उत्पादन लागत कम करने के साथ-साथ गुणवत्ता में सुधार किया गया है।
ग्रीन हाउस और पॉली हाउस जैसी संरक्षित खेती की तकनीकों ने अगेती व ऑफ-सीजन फसल उत्पादन को संभव बनाया है।
वहीं, जैविक खेती की ओर बढ़ते कदमों ने स्वास्थ्यवर्धक, सुरक्षित व पोषक सब्जियों की मांग को पूरा किया है। इससे फसलों में विटामिन और खनिज तत्वों की मात्रा बढ़ी है, जिससे स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों को लाभ मिला है।
मिट्टी परीक्षण और संतुलित पोषण प्रबंधन ने भी उत्पादन क्षमता को बढ़ाया है। इसके जरिए किसानों को कम लागत में अधिक और गुणवत्तायुक्त उपज प्राप्त हो रही है।
प्रदेश के सब्जी उत्पादक किसान अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनकर अपनी आर्थिक स्थिति को सशक्त कर रहे हैं।
