जिस निर्माण को ‘दुनिया का आठवां अजूबा’ बताया गया, वह अब जनता के लिए हंसी और नाराज़गी का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक ढांचे को लेकर दावा किया गया था कि यह 40 लाख रुपये में बना है, लेकिन अब नगर आयुक्त दीपक कुमार मिश्रा ने सफाई दी है कि इसकी लागत 20 लाख रुपये है।
हालांकि, स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का कहना है कि यह ढांचा न इंजीनियरिंग का नमूना है, न ही इसमें कोई आकर्षण है। देखने में यह ढांचा ऐसा प्रतीत होता है जैसे 5 लाख रुपये से भी कम में बन गया हो।लोगों ने इस ‘घंटा पिल्लर’ को भ्रष्टाचार और अयोग्यता का जीता-जागता उदाहरण बताया है। सोशल मीडिया पर इसका जमकर मज़ाक उड़ाया जा रहा है और सवाल उठाए जा रहे हैं कि आखिर इतनी भारी-भरकम राशि कहां खर्च की गई?स्थानीय नागरिकों और पारदर्शिता की मांग कर रहे संगठनों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।नगर निगम की कार्यशैली और पारदर्शिता पर उठते इन सवालों ने एक बार फिर सरकारी परियोजनाओं में भ्रष्टाचार के मुद्दे को गरमा दिया है।
