लखनऊ:
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तर प्रदेश ने औषधि निरीक्षकों की लापरवाही पर बड़ा कदम उठाया है। आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि औषधि निरीक्षकों द्वारा की जा रही सैम्पलिंग केवल औपचारिकता बन कर रह गई है। निरीक्षण कार्यों और लैब जांच की समीक्षा में सामने आया कि नमूनों की संख्या बेहद कम है और गंभीरता का अभाव है।
अब औषधि निरीक्षण होगा सख्त और निशाने पर होंगी:
बिना बिल वाली दवाएं, डिजिटल पेमेंट से खरीदी गई दवाएं, महंगी और तेजी से बिकने वाली दवाएं,हिमाचल, उत्तराखंड, पंजाब जैसे राज्यों के सस्पेक्टेड मैन्युफैक्चरर
कोडीन युक्त सिरप और मानसिक रोग की दवाएं,थर्ड पार्टी निर्मित दवाएं और कास्मेटिक,सिंदूर, बिंदी, लिपस्टिक जैसे रसायनयुक्त सौंदर्य प्रसाधन
अब होगी अर्न्तजनपदीय निगरानी:
अधिसूचना में 8 जनपदों के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है, जिनमें अन्य जनपदों के औषधि निरीक्षकों की नियुक्ति की गई है। आगरा, अलीगढ़ और मैनपुरी जैसे जनपदों को मिलाकर गठित इन टीमों का नेतृत्व सहायक आयुक्त (औषधि) स्तर के अधिकारी करेंगे।
लापरवाही बर्दाश्त नहीं:
सूत्रों की मानें तो नमूनों की गुणवत्ता और संख्या दोनों पर अब निगरानी कड़ी कर दी गई है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि औपचारिकता के नाम पर की गई सैम्पलिंग अब स्वीकार नहीं की जाएगी।
संदेश साफ है:
अब औषधि निरीक्षकों को अपने दायित्व के प्रति न केवल सजग होना होगा, बल्कि ठोस कार्रवाई भी करनी होगी—नहीं तो कार्रवाई तय मानी जा रही है।
