लखनऊ, 15 मई 2025 — उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक और सख्त और ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए राज्य में खाद्य पदार्थों में मिलावट और नकली दवाओं के कारोबार को ‘सामाजिक अपराध’ घोषित कर दिया है। सीएम योगी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। मिलावटखोरों और नकली दवाओं के कारोबारी अब कानून के साथ-साथ समाज की अदालत में भी जवाबदेह होंगे।
चौराहों पर लगेंगी मिलावटखोरों की तस्वीरें
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं कि जो लोग मिलावटी खाद्य पदार्थ या नकली दवाएं बेचते हुए पकड़े जाएंगे, उनकी फोटो प्रमुख चौराहों पर सार्वजनिक रूप से लगाई जाएगी। इससे न केवल उन्हें समाज में चिन्हित किया जा सकेगा, बल्कि अन्य लोग भी ऐसी हरकतों से बाज आएंगे।
‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत कार्रवाई
सीएम योगी ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को दोहराते हुए कहा,
“खाद्य पदार्थों में मिलावट और नकली दवाओं की बिक्री मानवता के खिलाफ अपराध है। इस पर किसी भी प्रकार की नरमी अस्वीकार्य है।”
एफएसडीए (खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन) की बैठक में सीएम ने अधिकारियों को आदेश दिया कि तेल, घी, मसाले, दूध, पनीर, ब्रेड जैसी दैनिक उपभोग की वस्तुओं की सघन जांच की जाए। साथ ही, उनकी उत्पादन इकाइयों पर भी छापेमारी की जाए।
हर जिले में सक्रिय जांच टीमें बनेंगी
प्रदेश के हर जिले में दूध और दुग्ध उत्पादों की विशेष जांच टीम बनाई जाएगी, जो निरंतर निरीक्षण करती रहेंगी। इसके अलावा, नकली दवाओं की बिक्री रोकने के लिए पुलिस और विभागीय समन्वय को और मजबूत करने का निर्देश भी दिया गया है।
जनता को भी मिलेगा हथियार: ‘फूड सेफ्टी कनेक्ट’ ऐप और टोल-फ्री नंबर
जनता अब ‘फूड सेफ्टी कनेक्ट’ मोबाइल ऐप और टोल-फ्री नंबर 1800-180-5533 के माध्यम से मिलावटखोरी की शिकायतें दर्ज करा सकती है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि
“शिकायत का निस्तारण तभी पूरा माना जाए, जब शिकायतकर्ता स्वयं संतुष्ट हो।”
तीन नए मंडलों में खुलेंगी अत्याधुनिक लैब्स
सीएम योगी ने बताया कि अयोध्या, अलीगढ़ और सहारनपुर में जून 2025 से नई मंडलीय खाद्य एवं औषधि प्रयोगशालाएं शुरू होंगी। इससे अब यूपी में हर साल 54 हजार से अधिक खाद्य और औषधि नमूनों की जांच संभव हो सकेगी।
वर्तमान में राज्य में 6 लैब्स (लखनऊ, वाराणसी, झांसी, आगरा, मेरठ और गोरखपुर) में हर साल 36,000 नमूनों की जांच होती है। नए लैब्स से 18,000 अतिरिक्त नमूनों की जांच संभव हो सकेगी।
सीएम ने प्रयोगशालाओं के संचालन और रखरखाव हेतु एक ‘कॉर्पस फंड’ की स्थापना का सुझाव भी दिया है, जिससे उनकी कार्यक्षमता और संसाधन बेहतर बनाए जा सकें।
पेशेवर रक्तदाताओं पर भी सख्ती
मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि राज्य में सक्रिय पेशेवर रक्तदाताओं की पहचान कर उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाए, ताकि रक्तदान प्रणाली में पारदर्शिता बनी रहे।
निष्कर्ष: जनता की सेहत से कोई समझौता नहीं
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह कदम साबित करता है कि उत्तर प्रदेश सरकार जनस्वास्थ्य को लेकर पूरी तरह सजग और प्रतिबद्ध है। यह फैसला न केवल मिलावटखोरों के खिलाफ चेतावनी है, बल्कि आम जनता को सुरक्षा और विश्वास का भरोसा भी देता है।
“मिलावट करने वालों को अब ना कानून छोड़ेगा, ना समाज भूल पाएगा।”
